रामायण - EP 5 - महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में अयोध्या के राजकुमारों की दीक्षा।

THILAK

THILAK

  • 3 followers

  • Category: Entertainment
  • |    

    AUTOPILOT

रामायण - EP 5 - महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में अयोध्या के राजकुमारों की दीक्षा।

रामायण - EP 5 - महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में अयोध्या के राजकुमारों की दीक्षा।

Published: 2 days ago

Category:

  • Entertainment

About:

भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। Ramayana - Episode 5 - Tadka Slaughter. Protecting Vishwamitra-yajna. Ahalya deliverance

ऋषि विश्वामित्र के आदेश का पालन करते हुए श्रीराम राक्षसी ताड़का का वध कर देते हैं। राम के बारे में अपना आंकलन सही देखकर ऋषि विश्वामित्र अत्यन्त प्रसन्न होते हैं। उनको विश्वास हो जाता है कि भविष्य के सभी संकटों पर राम विजय प्राप्त कर सकते हैं। ऋषि विश्वामित्र राम को दिव्यास्त्रों का ज्ञान देने का निश्चय करते हैं। वे उन्हें क्षत्रिय धर्म का महत्व बताते हैं और सचेत करते हैं कि क्षत्रिय को धर्मपालक के रूप में शस्त्र धारण करना चाहिये। उसे न तो अकारण अस्त्र-शस्त्र का उपयोग करना चाहिये और न ही किसी निर्दोष पर शस्त्र प्रहार करना चाहिये। ऋषि विश्वामित्र राम को दिव्यास्त्रों का महत्व और उनके मंत्र बताते हैं। दिव्य अस्त्र कितने प्रकार के होते हैं, इसका ज्ञान देते हुए वे श्रीराम को शिव का शूलमक नामक अस्त्र, ब्रह्मास्त्र, श्रीनारायण अस्त्र आदि दिव्यास्त्रों से राम को आत्मसात कराते हैं। ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ की पूर्णाहुति के दिन आश्रम में रावण के गुप्तचर असुर सुबाहु और मारीच आते है और यज्ञ में विघ्न डालने की चेष्टा करते हैं। भ्राता लक्ष्मण के साथ वहाँ पहरा दे रहे श्रीराम सुबाहु का वध कर देते हैं। राम जी के बाण से आहत होकर मारीचि दूर दक्षिण में समुद्र तट पर जा गिरता है। इससे प्रसन्न होकर ऋषि विश्वामित्र श्रीराम का आभार मानते हैं। वे राम को आपने साथ मिथिला चलने के लिये आमंत्रित करते है जहाँ सीता जी का स्वयंवर होने वाला है। मिथिला नरेश जनक के पास भगवान शिव का एक अनोखा धनुष है जिस पर प्रत्यन्चा चढ़ाने वाले वीर से सीता का विवाह करने की जनक ने प्रतिज्ञा ली होती है। मार्ग में ऋषि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को पवित्र नदी गंगा के दर्शन करवाते है और गंगावतरण की कथा सुनाते हैं। वे राम लक्ष्मण को बताते हैं कि गंगा मैया किस प्रकार पृथ्वी को उनके एक पूर्वज की देन है। इक्ष्वाकु वंश में एक राजा सगर हुआ करते थे। एक बार राजा सगर अश्वमेध यज्ञ कर रहे थे। इन्द्र उनसे ईर्ष्या करता था। वह राजा सगर के यज्ञ का घोड़ा चुराकर पाताल लोक ले गया और वहाँ कपिल मुनि के आश्रम में छोड़ गया। राजा सगर के पुत्र घोड़े को ढूंढ़ते हुए कपिल मुनि के आश्रम पहुंचे और वहाँ उन्होने मुनिवर का अपमान किया। इससे कपिल मुनि क्रोधित हुए और उन्होंने श्राप देकर राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को भस्म कर दिया। आगे चलकर राजा सगर के वंशज भगीरथ ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की और उनसे अपने पूर्वजों को तारने के के लिये गंगाजी को पृथ्वी पर भेजने का वर मांगा। किन्तु गंगा का वेग पृथ्वी सम्भाल नहीं सकती थीं तो ब्रह्मा जी के कहने पर महाराज भगीरथ ने पुनः तप करके शिवजी को प्रसन्न किया। शिवजी प्रकट हुए। महादेव ने भगीरथ को वचन दिया वो गंगा को अपने शीश पर धारण कर लेगें। ब्रह्मा के आदेश पर भगवान विष्णु के चरणों से निकलकर गंगा जी आकाश से धरती पर आयी। शिवजी ने उन्हें अपनी जटाओं में समेट लिया और उनकी एक धारा को धरती पर बहने दिया। गंगा के अवतरण से पाताल लोक और पृथ्वी लोक पर सबका कल्याण हुआ। इसके पश्चात ऋषि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को अहिल्या की कथा भी सुनाते हैं कि किस प्रकार देवराज इंद्र के कपट से अहिल्या जी को अपने पति गौतम ऋषि से श्राप मिलता है और वे शिला बन जाती है। तब राम जी के चरण स्पर्श से अहिल्या का उद्धार होता है। रामायण एक भारतीय टेलीविजन श्रृंखला है जो इसी नाम के प्राचीन भारतीय संस्कृत महाकाव्य पर आधारित है। यह श्रृंखला मूल रूप से 1987 और 1988 के बीच दूरदर्शन पर प्रसारित हुई थी। इस श्रृंखला के निर्माण, लेखन और निर्देशन का श्रेय श्री रामानंद सागर को जाता है। यह श्रृंखला मुख्य रूप से वाल्मीकि रचित 'रामायण' और तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' पर आधारित है। इस धारावाहिक को रिकॉर्ड 82 प्रतिशत दर्शकों ने देखा था, जो किसी भी भारतीय टेलीविजन श्रृंखला के लिए एक कीर्तिमान है।

निर्माता और निर्देशक - रामानंद सागर सहयोगी निर्देशक - आनंद सागर, मोती सागर कार्यकारी निर्माता - सुभाष सागर, प्रेम सागर मुख्य तकनीकी सलाहकार - ज्योति सागर पटकथा और संवाद - रामानंद सागर संगीत - रविंद्र जैन शीर्षक गीत - जयदेव अनुसंधान और अनुकूलन - फनी मजूमदार, विष्णु मेहरोत्रा संपादक - सुभाष सहगल कैमरामैन - अजीत नाइक प्रकाश - राम मडिक्कर साउंड रिकॉर्डिस्ट - श्रीपाद, ई रुद्र वीडियो रिकॉर्डिस्ट - शरद मुक्न्नवार

Please Login to comment on this video


  • Video has no comments

You may also like

1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video
1637fdc0e3940d1669323790
video